बुधवार, 12 जनवरी 2022

स्वामी विवेकानंद जी शिकागो मे यादगार भाषण दिए थे

स्वामी विवेकानंद का भाषण -



विवेकानंद जी ने अपने भाषण कि शुरुआत प्रिय  बहनों और भाईयों से की थी । उनहोंने अपने वक्तव्य मे कहा, आपके इस स्नेहपूर्ण और जोरदार स्वागत से मेरा हृदय अपार हर्ष से भर गया है । मैं आप सभी को दुनिया की सबसे पुरानी परंपरा की ओर से शुक्रिया करता हूँ। मैं आपको सभी धर्मों की जननी कि तरफ से धन्यवाद देता हूँ।


उन्होंने कहा, मेरा धन्यवाद उन लोगों को भी है जिन्होंने इस मंच का उपयोग करते हुए कहा कि दुनिया मे सहनशीलता का विचार भारत से फैला है । ' स्वामी विवेकानंद ने आगे बताया था कि उन्हें गर्व है कि वे एक ऐसे धर्म से हैं, जिसने दुनियाभर के लोगों को सहनशीलता और स्वीकृति का पाठ पढ़ाया ।

विवेकानंद जी सभी धर्मो का सम्मान करते थे 


शिकागो मे विश्व धर्म सम्मलेन के अपने भाषण मे स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि हम सिर्फ सार्वभौमिक सहनशीलता में हि विश्वास नहीं करते हैं। बल्कि हम दुनिया के सभी धर्मों के सामान मानते हैं और सभी धर्मों का सम्मान करते हैं। और सभी धर्मों को सत्य के रूप मे स्वीकार भी करते हैं । मैं गर्व करता हूँ कि मैं एक ऐसे देश से हूँ जिसने इस धरती के सभी देशों और धर्मों के परेशान और सताए गए लोगों को सहारा दिया है ।


उन्होंने कहा कि यह बताते हुए मुझे गर्व हो रहा है कि हमने अपने हृदय मे उन इजराइल की पवित्र स्मृतियां संजोकर रखी हैं, जिनके धर्म स्थलों को रोमन हमलावरों ने तोड़ तोड़कर खंडहर मे तब्दील कर दिया था। इसके बाद उन्होंने दक्षिण भारत मे शरण ली थी ।

मुझे गर्व है कि मेरा देश किसी धर्म का अपमान नहीं करता 


स्वामी विवेकानंद जी ने कहा था कि सभी धर्मों के लोगों को शरण दी । मुझे इस बात का गर्व है कि मैं जिस धर्म से हूँ । उसने महान पारसी धर्म के लोगों को शरण दी है। इसके बाद अभी भी उन्हें पाल रहा है। इसके बाद उन्होंने श्लोक की कुछ पंक्तियाँ भी सुनाई थीं।

रूचिनां वैचित्रयादृजुकुटिलनानापथजुषाम्  नृणामेको  गम्यसत्वमसी पयसामणव इव ।।


श्लोक का अर्थ


जैसे नदियाँ अलग अलग स्त्रोतों से निकलती है और आखिर में समुद्र मे जाकर मिलती हैं । वैसे ही मनुष्य अपने इच्छा के अनुरूप अलग अलग रास्ते चुनता है।


उन्होंने कहा, 'लंबे समय से कट्टरता, सम्प्रदायिकता, हठधर्मिता, आदि अपने शिकंजे मे जकडे हुए हैं। इन सभी ने धरती को हिंसा से भर दिया है। कई बार धरती खून से लाल हुई है, इसके आलावा कई सभ्यताओं का विनाश हुआ है और ना जाने कितने देश नस्ट हो गए।

इस प्रकार स्वामी विवेकानंद जी के वक्तव्यों ने विश्व मे उनको प्रसिद्ध कर दिए । हम ऐसे महान विचारशील व्यक्ति को नमन करते हैं। स्वामी विवेकानंद जी के भाषण ने विश्व को एक नई ऊर्जा दिया और लोगों को विचार करने को प्रेरित किया ।


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