नमस्कार दोस्तों आप सभी का मेरे इस ब्लॉग में स्वागत है, उम्मीद करता हूँ आप सभी स्वास्थ और प्रसन्न होंगे।
संकल्प -
यह कहा गया है कि " मन के हारे हार है मन के जीते जीत " यदि दृढ़ श्रद्धा और विश्वास से ठान लिया जावे कि मुझे अमुक कार्य करना है वह निश्चित ही पूर्ण होगा।
कुछ महान लोगों ने संकल्प किया वह पूर्ण हुआ जैसे इब्राहिम लिन्कन ने मन में बचपन से ही ठान लिया था कि मैं अमेरिका का राष्ट्रपति बनूँगा, एक दिन वह राष्ट्रपति बन गए जबकि वह बहुत गरीब किसान का बेटा था लेकिन दृढ़ निश्च्य ने उसे पूर्णता की ओर पहुंचाया।
श्री नेपोलियन ने भी यही किया था और उसने तो यहाँ तक कहा की असंभव शब्द को डिक्सनरी से निकाल दिया जाय। परमपूज्य महात्मा गाँधी ने प्रण किया था कि भारत से अंग्रेजों को हटाना है वह भी पूर्ण हुआ। संकल्प करने के लिए कुश और अक्षत की आवश्यकता नहीं पड़ती यह मन रुपी कुश और श्रद्धा रुपी अक्षत से ही किया जा सकता है। यदि हम उक्त प्रकार से प्रण अथवा संकल्प करते हैं तो कार्य निश्छित ही पूर्ण होगा इस प्रकार हमारे पूर्वजों ने ऐसा किया।
रघुकुल में यह प्रचलित था कि -
" रघुकुल रीति सदा चली आई, प्राण जाए पर वचन न जाई "।
भीस्म पितामह ने भी प्रण किया तथा अनेक ने किया और कार्य हुआ आप भी मन में विचार करें और संकल्प करें की हमें परीक्षा में मेरिट में आना है तो उदाहरणों से पता चलता है कि की ताकत एवं कमी आड़े नहीं आ सकती आप सफलता प्राप्त कर सकते हैं। आप कोई परिणाम चाहते हैं लेकिन मेहनत नहीं करना चाहते और न उस अमुक परिणाम को पाने हेतु कोशिश करते हैं।
मेरी समझ में आपने जीवन का उद्देश्य है नहीं बनाया है। आप क्या बनना चाहते हैं और आप की कौन सी मंजिल है। पहले आप निश्चित करें की आप क्या बनना चाहते हैं क्या प्राप्त करना चाहते हैं और उसकी प्राप्ति के बाद उसका क्या उपयोग होगा। यदि उपयोग स्वहित हेतु होगा तो उत्ना कारगर नहीं होगा।जनहित की इच्छा से किये गये कार्य में सफलता अधिक मिलती हैं।
स्वहित की इच्छा से करने वाले तप व श्रम राक्षसी प्रवर्ति के होते हैं । जैसे बहुत से राक्षसों ने किया और अंत में उसका परिणाम अच्छा नहीं रहा -
जनहित,समाजहित,मानव,जीव हितार्थ कार्यों में सफलता तो मिलती हैं, देव शक्तियों भी सहायता करती हैं।
संकल्प दिखावटी एवं नाहक प्रह्सन वाला नहीं होना चाहिए । मन के अंदर से भाव ुउत्पन्न होना चाहिए ।
जब भाव अंदर से उत्पन्न होगा तो उसमें रस निकलेंगें । आपके अंदर स्थाई भाव वाले ग्यारह रस हैं आप उनका प्रयोग करें । सचमुच में ये रस वैज्ञानिक भाषा में हार्मोन्स कहलाते हैं। इनकी बहुत बड़ी उपयोगिता है।
हार्मोन्स एवं रस बनावटी एवं नकली भाव से नहीं निकल सकते। सचमुच में आपको श्रद्धा और विश्वास के साथ करना है। धुर्व प्रहलाद ने संकल्प किया जिससे इस छोटे से बच्चे से ईश्वर की तुलना की जाती हैं क्योंकि बच्चे सच्ची श्रद्धा और विश्वास के साथ कार्य करते हैं ।
कथा है - कि एक बार एक बच्चे की मां ने अपने बच्चे से बोला कि भगवान को भोजन करा देना अर्थात भोग लगा देना तब ग्रहण करना । बच्चा नहीं जनता था कि भगवान भोजन नहीं करते। उसने रट लगा दी और अंत में भगवान को स्वयम आकर भोजन प्रसाद ग्रहण करना पड़ा ।
एक दिन की बात है कि बच्चों को पास होने की तरकीब बता रहा था कि आप सबसे पहले लक्ष्य निर्धारित करें की कौन सी श्रेणी प्राप्त करना है दूसरा कार्य प्रतिदिन एक विषय की एक इकाई पढ़े पढ़ सकते हैं क्योंकि सुना और देखा हूँ कि कुछ लोग उपन्यास आदि मोटी मोटी पुस्तकें एक दिन में समाप्त कर देते हैं यदि आप चाहें तो चोबीस घंटे में ये इकाई आसानी से समाप्त कर सकते हैं न चाहने वाले ही समाप्त नहीं कर पाते।जहाँ चाह है वहां राह मिल जाता है । तीसरा कार्य बताया की आप अपना मूल्यांकन स्वयम करें की जो अध्धयन किया हूँ वह कितना दिमाग में रह गया है।
मनन एवं चिन्तन करें चोथा कार्य कठिनाईयां नोट करें और अपने से बड़े लोगों समझने की कोशिश करें यदि आप में चाह है तो समझाने वाले बहुत मिल जाएँगे। इस प्रकार का कार्य आप नित्य करें आपको सफलता मिलेगी । किसी भी वस्तु को प्राप्त करने कर लिए कठिन परिश्रम अथवा तपस्या करनी पड़ती है। यही तो तप है तप में बड़ी शक्ति है।
अपनी शक्ति ताकत को भूल गये हैं आप बहुत शक्तिशाली हैं आपके शरीर में 60 खरब कोशिकाए है जिनमें माइत्कोइन्द्रिया विद्युत ग्रह मौजूद हैं। जाग्रत करें ।हनुमान जी जैसे अपनी ताकत को भूल गये हैं याद दिला रहा हूँ। याद करें और कार्य पर जुट
जाएँ सफलता अवश्य ही मिलेगी मेरा दृढ़ विश्वास है।
धन्यवाद
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