इसमें संविलियन कर समान पद नाम वा वेतन दिया जाना था लेकिन विभाग के अफसरों ने गुमराह कर अध्यापक संवर्ग के संविलियन को जुलाई 2018 से शिक्षा विभाग के स्थान पर एक नया कैडर राज्य शिक्षा सेवा में नवीन नियुक्ति प्रदान कर दी। जिससे प्रदेश के 2 लाख 37 हजार अध्यापकों की करीब 22 वर्षों की सेवा शून्य हो गई है। उनकी वरिष्टता,पदोन्नति,क्रमोन्नति, ग्रेच्युटी, परिवार पेंसन इत्यादि से भी वंचित कर दिया गया।
मुख्यमंत्री कि घोषणा अनुसार अध्यापक संवर्ग का शिक्षा विभाग में संविलियन होता, तो समस्त अध्यापक संवर्ग को नियमित शिक्षक संवर्ग के समान सभी शासकीय सेवा शर्तों का लाभ प्राप्त होता।
लेकिन विभाग के अधिकारीयों ने मूल विभाग के वर्ष 1994 मे मृत शिक्षक संवर्ग के कैडर को पुनर्जिवित करने के स्थान पर नए राज्य शिक्षा सेवा कैडर में संविलियन के स्थान पर नियुक्ति कर दी।
इससे अध्यापक संवर्ग को जुलाई 2018 से नए सिरे से नियुक्ति मानी गई। इसके फलस्वरुप प्रदेश के समस्त अध्यापक की पूर्व मे की गई सेवा के अनुसार शासकीय लाभों को प्राप्त करने के लिए दर दर कि ठोकर खाने के लिए मजबूर हैं । राज्य शिक्षा सेवा की विसंगतिपूर्ण सेवा शर्तों, नियुक्ति के स्थान पर संविलियन करने व प्रथम नियुक्ति दिनांक से वरिष्ठता देने समेत अन्य बिंदुओं को लेकर हाई कोर्ट में याचिका दायर कर दी है।
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