बुधवार, 23 सितंबर 2020

URL,Domain names क्या है? domain name क्यों लेना चाहिए ? domain name कितने प्रकार के होते हैं

दोस्तों कैसे हैं आप दोस्तों उम्मीद है आप सब कुशल होंगे दोस्तों आज मैं आप लोगों के लिए एक नई जानकारी लेकर आया हूँ तो उम्मीद है आपको मेरा लेख पसंद आएगा तो चलिए जानकारी की और चलते हैं दोस्तों अगर आप URL और डोमेन नेम की जानकारी ढूंढ रहे हैं तो यह पोस्ट आपके लिए बहुत उपयोगी है तो बने रहिये इस लेख में


URL क्या है-


 URL का विस्तार नाम Uniform Resource Locator है। यह एक निश्छित् मापक् है जो किसी सूचना को इंटरनेट पर व्यक्त करता है। एक URL वेब पर किसी भी साइट अथवा वेब पेज़ का एड्रेस होता है, उदाहरण के लिए 

http://www.microsoft.com/ms.htm

एक URL के मूल्तह् निम्न चार भाग होते हैं:

प्रथम भाग उस प्रोटोकॉल को दर्शाता है जिसका प्रयोग कर इस डॉक्यूमेंट को प्राप्त करने  के लिए किया जा रहा है। उपरोक्त उदाहरण में  http वह् प्रोटोकॉल है। इसके अतिरिक्त ftp और telnet ऐसे प्रोटोकॉल हैं, जिनका प्रयोग अधिकांशतः किया जाता है।

URL का दूसरा भाग उस होस्ट कंप्यूटर का नाम होता है जिस पर वान्छित् डॉक्यूमेंट सङ्रहित् है। उक्त URL में हम microsoft के होस्ट कंप्यूटर पर रखे डॉक्यूमेंट को प्राप्त करना चाहते है। URL के इस भाग को डोमेन भी कहा जाता है। सामान्यतः डोमेन नेम के अंत में दिया गया शब्द  .com उस संस्था की प्रकृति के बारे में जानकारी देता है। जैसे .com व्यवसायिक् संस्थाओं के लिए, .edu   शैक्षणिक् संस्थाओं के लिए , .gov सरकारी संस्थाओं की लिए प्रयोग में लिए जाते हैं।

कई बार डोमेन के अंत में देश का कोड भी होता है। जैसे http://www.msn.vo.uk   इंग्लैंड का और http://www.msn.co.in भारत का होने का संकेत देता है।

 URL का तीसरा भाग उस dairectry को दर्शाता है जिसमें डॉक्यूमेंट सङ्रहित् किया हुआ है। चोथा भाग उस डॉक्यूमेंट अथवा फाइल को जिसे हम अपने ब्राउज़र में लाना चाहते है । उपरोक्त URL में वह डॉक्यूमेंट ms. htm है, जो होस्ट कंप्यूटर की रुट dairectry में सङ्रहित् है।इसलिए यहाँ तीसरे भाग के रूप में किसी भी dairectry का नाम नहीं दर्शाया गया है। परंतु यदि हम  http://www.microsoft.com/windows/default.asp में देखें तो windows वह dairectry  है, जिसमें default. asp नामक डॉक्यूमेंट सङ्रहित् किया गया है।


 डोमेन नेम-


किसी व्यक्ति या शहर के समान इंटरनेट से जुड़े हुए कम्प्यूटर्स को को भी डोमेन नाम प्रणाली के अंतर्गत शब्दों में नाम प्रदान किये जाते हैं,ताकि उस कंप्यूटर की स्तिथि को जाना जा सके।इंटरनेट से जुड़े प्रत्येक होस्ट कंप्यूटर के एक डोमेन नाम अवश्य होता है।इन शब्दों से बने डोमेन नाम की समान्तर् ही इन कम्प्यूटर्स को एक अंको पर आधारित इंटरनेट प्रोटोकॉल पता अवस्य होता है।

डोमेन नेम की सहायता से किसी भी कंप्यूटर के संस्थान व उसकी भौतिक स्तिथि का पता लगता है,अर्थात यह कंप्यूटर किस देश के है ,किस संस्थान का है व वह किस प्रकार का है इसका अनुमान सरलता से लग जाता है। डोमेन नेम को समझने के लिए हम निम्न उदाहरण को लेते है:

माना           bare.res.rent.in

किसी कंप्यूटर का डोमेन नेम है। इसे निम्न प्रकार दायी ओर से समझा जा सकता है:

1.   यह  .in अर्थात India में स्थित है।

2.  यह rnet अर्थात रिसर्च नेट्वर्क के अंतर्गत है।

3.  यह res अर्थात रिसर्च से सम्बंधित है।

4.  इस कंप्यूटर का नाम BARC है, जो संभवतः किसी संस्थान के नाम है। इंटरनेट के अंतर्गत 6 ऐसे भी डोमेन हैं जो भोगोलिक् स्तिथी पर आधारित नहीं है।अर्थात इनके साथ देश का कोड नहीं लगा है। ये निम्न हैं -

.com    वाणीजियिक् संस्थानों के लिए ।

.edu      शिक्षा संस्थानों के लिए।

.gov      शासकीय संस्थानों के लिए।

.mil       सैन्य संस्थानों के लिए।

.net       इंटरनेट के अंदर ही अन्य नेट्वर्क संस्थानों के                लिए।

.org       उन संस्थानों के लिए जो न तो वानिजियिक्                  और न ही शिक्षा में आते हैं।

नोट - .com, .edu ,  .gov  डोमेन अमेरिका स्थित हैं। अमेरिकन् डोमेन में .us   देश का नाम नहीं लगाते हैं। अर्थात जहाँ देश का नाम .in, .au,  .uk नहीं होता वह सर्वर अमेरिका स्थित है।

दोस्तों उम्मीद है आपको मेरा ये लेख आपको पसंद आया होगा । यदि आपको हेल्पफुल लगा हो तो कमेंट बॉक्स में कमेंट जरूर करें और शेयर करना न भूलें।






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